प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#दोस्ती
      वो और मैं उन लोगों के लिए एक अच्छा उदाहरण थे जो कहते थे एक लड़का एक लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते.... स्कूल का वो दिन जब मेरे कुछ दोस्तों ने मेरे जेहन में ये बात डाली के वो सिर्फ मेरी अच्छी दोस्त नहीं उसे ज्यादा है । मन बच्चा था वो अहसास ही नया था न पच रहा था न दिमाग़ में कुछ आ रहा था फिर क्या मैं भी पूरा ढीट था कहाँ माने वालों में से था एक दिन क्लास के बाहर पकड़ लिया और न नुकुर करते करते बोल ही दिया के पसंद करता हूं, वो भी सकपका सी गयी ये क्या बोल दिया जितना समय हम दोनों को वो बात करने का मिला सिर्फ इतना याद है के उसने कहा मुझे समय चाइये।
तो मेरी कौनसा ट्रैन छूट रही थू कह दिया लो पूरा समय लो उसमे एक महीने का समय मांगा इसी बीच पड़ गया 5 sep यानी टीचर्स डे वैसे तो हर साल आता है पर इस साल कुछ खास था क्योंकि उस दिन होंना था डांस कॉम्पिटिशन और वो खास था क्योंकि जब कॉम्पटीशन के लिए नाम लिखवा रहे थे तो उसका हाथ ऊपर था और अब उसका हाथ ऊपर था तो ये बेचारा हाथ क्या करता ये भी साथ मे ऊपर हो गया।
दोनों एक गई ग्रुप में थे 5sep जैसे जैसे नज़दीक आता रहा वो परेशान रहने लगी 4 sep दोपहर का टाइम था वो आयी और परेशान होकर कहने लगी हम हार जयंगे सबकी तयारी हमसे बहुत अच्छी है, मैं उस ग्रुप में 14 कन्याओं के साथ अकेला था फिर की मैंने उसे हिम्मत दी और एक कोने में ले जाकर कहा जीत हमारी ही होगी पर वो जो एक महीने का टाइम खत्म करके उसी दिन जवाब देना होगा वो मान गयी जैसे उसे पता हो हम नहीं जितंगे।
     वो दिन भी आया हम क्या नाचे बसन्ती भी क्या नाची होगी गब्बर के सामने सब खड़े होकर once more... once more कर रहे थे हमारे जितने की मोहर तो लग गयी थी बाकी 13 लड़कियों को कैंटीन से बर्गर खिलाया सब खुश थे हम जीत चुके थे,पुरुस्कार में oxford की dictionary  मिली थी पर उसकी चिंता किसे थी।
       फिर उसे मिला जवाब मांगा वहाँ से हाँ आया उस दिन वो 13 बर्गर के पैसे उसूल हो गए फिर क्या उस दिन तो अरोरा सर् की डांट भी अच्छी लग रही थी , पर उस हाँ के 17 दिन तक मोहतरमा ने बात तक नही की मैं भी कुछ नहीं बोला 17वे दिन मैंने उसका रास्ता रोका ओर पूछा क्या हुवा उसने बस इतना कहा हम दोस्त ही अच्छे है......... वो दिन और आज का दिन है हम आज भी सबसे अच्छे दोस्त है।
कुछ रिश्ते हमेशा के लिए होते है जैसे
#दोस्ती
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

#हम_न_होंगे_तुम_न_होंगे_गीत_ही_रह_जाना_है.
              क्या ख़ूब होता है संगीत भी हर वर्ग उम्र का अपना एक स्वाद है गानों का, माँ की लोरी हो या बाथरूम में नहाते वक्त की मस्करी दिल के किसी कोने में हर असहास के लिए एक तराना होता ही है।कभी नौकरी की जी हजूरी से थकावट महसूस हो तो "सारी उम्र हम मर मर के जी लिए" सुनो उसे आपके ऑफसी की डेडलाइन या टारगेट पर तो फर्क नहीँ पड़ेगा पर वो सुस्त उदास चेहरा अब आपके होटो के साथ थोड़ी देर के लिए मसगुल हो जयेगा।
                 हज़ारों ही गाने संजो लो अपने प्लेलिस्ट में पर कभी यूँही कभी ऑटो में बैठे "पुकारता चला हु मैं घड़ी घड़ी.... सुन लोगे तो वहीं इंडियन आइडल का ऑडिशन देने लगोगे।मानों न मानों आज भी रहमान का "वंदे-मातरम" रोंगटे खड़े कर देता है, आज भी गोविन्दा का "हीरो जैसे नाच के दिखाऊ पर नाचने का मन करता है, और कभी सफर करते करते हल्की बारिश में एक ठंडा हवा का झोका आपको खिड़की से धपा करता है तो वही ढिंचक फीलिंग आती है "आज मैं ऊपर अस्मा नीचे....आज में आगे जमाना है पीछे।
                 कभी कभी एक गाने के कुछ बोल ही इतना असर कर जाते है जो दवा भी नहीं करती, वो पहला साइकिल के जमाने वाला प्यार जो मासूम होता है तब हर रोमेंटिक गाने में बस उन्ही का चेहरा दीखता है, बचपन में "जंगल जंगल बात चली है पता चला...... " गाते गाते संडे को मोगली देखना। कभी दोस्तों के संग घूमने चले जाओ तो " दिल चाहता है हम न रहे कभी यारो के बिन...... उस सफर को और भी यादगार बना देता है. इतने जमाने आये कितने  कितने गए पर आज भी हर किसी के फ़ोन में किशोर डा .. बरमन सहाब और लता जी की एक ख़ास जगह है। 
बाकि 
ये मेरा व्यक्तिगत है अगर अगर आपके साथ ऐसा नहीं है तो भाई सो जाओ
शुभ रात्रि 😉
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#ख्याल
क्या अहसास है ये भी बस सोच सोच मोक्ष के द्वार तक हो आता है,
किसी से कोई उम्मीद भी नहीं रखनी पड़ती और पल भल के लिए सही मन तृप्त हो जाता है।



सच्चा साथी यहीं है अकेला देखते ही आपको तुरंत आ जाता है,
 कभी किसी पुरानी यादों को ताज़ा कर देता है तो कभी किसी अधूरी ख्वाईश का रोना रो जाता है।



रातों को नींद न आये तो भी ये ख़ूब साथ निभाता है,जिनका वास्तविक्ता का कोई लेना-देना नहीं ज़नाब ऐसे ऐसे दृश्य दिखाता है।



कभी तो ये हमें बैठे-बिठाये मीलों का सफऱ तय करवा जाता है,
 जिन हसरतों को हम पूरा नहीं कर सकते ये खुद-ब-खुद में पूरा कर आता है।



बड़ा मनमौजी है ये इसपर क़ोई जोर नहीं चलता, ख़्याल है ये शाहब दिमाग़ से खूब बतियाता है पर शोर नहीं करता।

#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है...

#समझ
मैं पसंद तो सबकी हूँ पर मौका पड़ने पर, 
क़ाबिल भी समझा जाता हूँ कभी कभी दूसरों का काम करने पर।

अपने मतलब के हिसाब से मुझे पहचानते चले गए,
कुछ कामयाब निकले कुछ मुझे हारते चले गए।

बड़ी शिद्दत से निभाया मैंने हर किरदार जिसने मुझे जो दिया,
पर आखिर में वो आगे बढ़ गए मुझे मेरी कामिया गिना कर।

अजीब दौड़ है औकात को हैसीयत में बदलने की,
तर्रकी के लिये कुछ भी कर गुज़रने की।

अब कहा कोई गर्मियों की छुट्टियों में गांव जाते है,
जिस दिन जयदा गर्मी लगी जनाब उस दिन स्वीमिंग पुल हो आते है।

दो वक़्त की रोटी के चक्कर में इतनी मसगुल हो गयी ज़िंदगी,
के याद नहीं के आख़री बार फ़ुरसत से खुद से रु-ब-रु कब हुवे थे।

वज़ूद कुछ ऐसा हो गया है के अपने शिकायत रखते है और पराये जलन करते है,
हम अभी भी नादान है पता नहीं लोग कैसे अच्छे- बुरे की समझ रखते है।

:-मनीष पुंडीर 
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... .

 #उम्र
 अब उम्र हो चली है उस उम्र की
जब हम बेफिक्र थे,अब तो बस जिंदगी को
 क़ाबिल बनाने में लग है ख्वाईशो
 को हासिल कराने में लगे है....


आदत हो गयी आदत बदलने की माहौल देख के माहौल में ढलने की,
ये दुनियां बड़ी फ़नकार है हुनरमंद को ही पूछती है ग़लती करने वालों को नहीं मिलती मोहलत दुबारा सम्भलने की.....


उम्र लग गयी लोरी से नौकरी पर आने में बहुत कुछ बदला है वहाँ से यहाँ आने में,
हम तो खुश थे अपनी मासूमियत के साथ पर क्या करे क़दर ही यहाँ चालाकी की है जमाने में...
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है...

#हसरते
लाखों हसरते है ऐसी के न बताई जाये न दबाई जाये,
दुनियां बड़ी चंट न समझ आये और न अपनी किसी को समझाई जाये.....

परिंदा बन उड़ने को मन खूब ज़िद तो करता है,
पर मज़बूरी शिकार खूब जानती है ये बात इसे कैसे समझाई जाये ??

नदी किनारें सभी अहसासों का एक दिन में हिसाब करूँगा,
लहरें पैरों को छूकर फिर लौट जायेगी पर मैं नही माफ़ करूँगा।।

आईने में देख खुद को आँखों में बचपन टटोलता हूँ,
अक़्सर अधुरी ख्वाइशों का बोझ लेकर तकिए पर सोता हूं।।

इस शहर के शोर से दूर कही दूर बस जाऊ जहाँ दिए के उजाले में आज भी दादी-नानी सर सहलाये,
बारिश के पानी में कस्ती अपनी बढ़ाये आज फिर किसी बगीचे से आम तोड़ के खाये।।

कुछ है मेरी हसरतें जो पैसे से कीमती है बेचूँगा किसी दिन इन्हें कोई ख़रीदार मिला तो,
पर फिर मन ये पूछे मुझसे इन दो कौड़ी के जज़्बातों की क्या कीमत लगाई जाए ??

वैसे मेरे अपने कहते है हँसना भूल गया हूं मैं अब उन्हें क्या वजह बताई जाये,
मेरे यारों खुश हूँ तुम हो बस ख़ुद से खफ़ा हूं अब छोड़ो यार क्या नाराजगी जताई जाये।।

Mushayera || funny_shyari || Manish Pundir

https://www.youtube.com/watch?v=yk0MhlO07kk ho rhe ho bore.. to kis bat ka wait hai... dekho mushyera nawab shaab ka... hassi a...