Mushayera || funny_shyari || Manish Pundir



















https://www.youtube.com/watch?v=yk0MhlO07kk

ho rhe ho bore..
to kis bat ka wait hai...
dekho mushyera nawab shaab ka...
hassi aani ek dum perfect hai.

#funny_shayari

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regards,
Manish Pundir




प्रयास कुछ बेहतर के लिए.....सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

Mushayera || funny_shyari || Manish Pundir





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Manish Pundir




 प्रयास कुछ बेहतर के लिए.....सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

माँ । maa ka pyar | love you maa | bussy life | Manish pundir



प्रयास कुछ बेहतर के लिए.....सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


उनके लिए
जो काम के लिए #माँ
से दूर है

खुद में रखा मुझको इस दुनियां में लाने को,
तेरे लिए लाखों में एक हु चाहे लाख बुरा मै जमाने को।

तू न होता तो मेरी परवाह करता कौन ??,
मेरी शरारतों और मेरी ज़िद के लिए पापा से लड़ता कौन ??

माँ वक़्त तुझे मै दे पाता नहीं,
प्यार तो बहुत है पर मेको जताना आता नहीं।

बचपन में चोट मुझे जो यूंही लग जाती थी,
मै तेरी गोद में सो जाता था पर सारी रात तू जागती थी।

मेरी पसन्द का मुझसे ज़्यादा तुम्हें ख्याल था,
अब दूर हूँ पर परवाह आज भी है जब भी फ़ोन आया
"खाना खाया" ?? हर बार यही सवाल था।

आपने मुझे चलना सिखाया खुद की ख्वाइशों से
पहले मेरी चाहतों का आपको ख्याल आया,
मै नादान अभी तक समझ न पाया प्यार तो बहुत है
 आपसे न जताना आया न बताना आया।

होंगे किसी के राम किसी का अल्लहा मालिक,
मेरे लिए तू मेरी आँखों के सामने तू ही मेरा भगवान।

याद आता है जब खाना मेरी पसन्द का न हो तो मै खाता नहीं था,
आज अपने हाथो की खिचड़ी से भी रात गुज़र जाती है
तब माँ सच में तेरी याद बहुत आती है।

आता हूँ जब छुटियों में घर तो मेरी पसन्द का सब आप बनाते हो,
बड़ा सुकून मिलता है जब वापस लौटते वक़्त मुझे गले से लगाते हो।

 
#mani

Bakchod dost | every gang has a irritating friend | IPS ki tyari | Manis...



प्रयास कुछ बेहतर के लिए.....सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#तकिया
कहने को एक रुई से भरा बन्द थैला है,
पर उसे ही पता है इसने हमे कितना झेला है।

कभी हमारे सपनों का बोझ लिए हमें सुकून से सुला दिया,
कभी हमारी आँखों के आंसुओं को खुद में सोख लिया जब किसी ने रुला दिया।

कभी जज्बातों से लड़ कर हम हार गए तो इसने प्यार से गले लगा लिया,
कभी जो मस्ती का मूड हुवा तो इसे ही लड़ने लगे पर इसने कभी न मना किया।

साथ रात में इसने खयालो से वो सभी बेतुकी बातें भी सुनी,
और फिर कभी हमारे मूड के साथ मिलकर इसने कई कहानियां बुनी।

कभी नाराज़ भी न हुआ जो हमने रात इसे बिस्तर से गिरा दिया,
खुशि तो थी पर इसने दिखाई नही जो कल हमने इसे नया कवर दिला दिया।
#mani

Different dance | different occasion | dance lovers



प्रयास कुछ बेहतर के लिए.....सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

#मैं_तरसा_हूँ

मैं तरसा हूँ  हर उस पल को जो जी न सके पर ज़रूरी था,
दोनों की अपनी कहानी थी एक की मोहलत दूसरे की मज़बूरी था।

तेरा जिक्र किये खुद से अकेले में एक अरसा हुवा,
आज सुनले शयद कल ना बोलू जो है दिल में भरा हुवा।

तेरा होना ही काफी होता है मुस्कुराने को, 
बस तू पसंद है अब क्यों परेशान करूँ किसी बहाने को।

तेरे लिए सोच में एक महल बना रखा है,
कभी कभी तो तुझे खुद की नजरों से भी बचा रखा है।

लोगो ने तो यूँही बदनाम किया है मरे तो हम शराफत में है,
बस रहा जाता नहीं..
कहना आता नहीं क्या करे क्या न करे इसी आफत में है।

कभी उस पल को भी तरसा हूँ तेरा नाम तो आया ज़ुबान पर तेरे चहेरे को तरसा हूँ,
आधी रात में खुली आँखो से तेरे लिए दिल-ओ-दिमाग़ से लड़ा हूँ।

बहुत से कहते है दोस्त बहुत अच्छा हूँ पर शयद दूसरों को हसाते हसाते ख़ुद मायूस हो गया हूँ,
शयद खुशियां बाटते बाटते खुद की खुशि के लिए अब मतलबी हो गया हूँ।

:-मनीष पुंडीर
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

#जिंदगी
क्या खूब है तू भी जिंदगी कहने को सांसो कि डोर है पर हर वक़्त जब भी सुकून ढूँढू तो वो मिलता उस ओर है,हँसने के भी उतने ही मौके दिए तूने जितने आँसुओ की बुँदे गिरवाई है पर तब भी सबका तेरे से शिकायतों का शोर है...

महफ़िल में भी आऊंगा रंग भी जमाउंग पर मय को हाथ नहीं लगाउँगा,
क्योंकि अब वो बात नहीं रही मेरे गमो को कम करदे नशे में वो औकात नही रहीं...

हसरत तो रोज़ बदलती है बदलती दुनियां के साथ पर फितरत कैसे बदलोगे,
बेहोसी कब तक रखोगे जहन में अपनों को रुला कर कबतक झूठी हस्सी हँसोगे...

एक वक़्त आएगा जब अकेले हो जाओगे फिर चाह कर भी वक़्त नहीं लौटा पाओगे,
साथ हँसने वाले तो बहुत मिलंगे पर रोने पर कंधा देने वाला कहाँ से लाओगे??

किस बात की अकड़ किस बात का गुरुर है आखिर में जागीर में एक सफ़ेद चादर और दो गज़ ज़मीन ही हिस्से आनी है,गलती आदत ना बन जाये और आज की हरकत कल खुद पर लौट के आनी है बस जिंदगी की इतनी सी कहानी है...

बहुत सरल और सीधी बात है जो ख्याल रखते है आपका उनका भी ख्याल करो,
खुद की खुशि तो बहुत अज़ीज़ है पर कभी उनकी खुशि के लिए लड़ो...


होगा एक दिन ऐसा भी के दिल में मलाल होगा और होंटो पर काश होगा,
पर शयद फिर देर हो चुकी होगी और अपना ना कोई आसपास होगा...
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

#मैं_डरता_हूँ
मैं नहीं डरता किसी शत्रु या प्रहार से,
मैं तो डरता हूँ बीन प्रयास किये हार से।

उन आँखों का तो भरोसा भी हो जो तुम्हें निहारे ,
मैं तो डरता हूँ रात को बंद होती नज़रो से जो सुबह खुलेगी ??
बंद होती इसी उम्मीद सहारे।

ये मेरा वो तेरा दिल बंटवारे को भी तैयार है
आजा हिसाब करते है, हम तो श्याम कहलाये जायँगे
पर तु मीरा न हो जाये इस बात से डरते है।

जवानी तो धोका है कुछ नहीँ चंद लम्हों का शौक है,
किसी के अंदर का बचपन न मरे हमे तो इस बात से खौफ़ है।

न मोह किसी शोहरत का वो मिले जो जीने को ज़रूरी हो,
न हो घमंड रावण सा न कभी युधिष्टिर सी मजबूरी हो ।।।


रिश्तों की अब इतनी कहानी वहीँ अपना जरूरत पर जो काम आए,
न बन सको अगर लक्ष्मण तो न विभीषण ही तुम्हें बनाये।
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

#खुशी_कहाँ_है ??
खुशी है...
अपनों के प्यार में,माँ के बनाये आम के आचार में.…
हर पहली चीज में पहली नौकरी पहली सैलरी पहला प्यार पहली कार.…

बच्चे की पहली हसी में,दिल को छूती बात पर आँखों की नमी मे.....
माँ के हाथ के खाने में,युही किसी ख्याल से मुस्कुराने में.…

पापा के घर जल्दी आ जाने में,बिन मौसम बरसात में नहाने में.……
महीनो पुरानी रखी चीज जब अचानक मिल जाये,जब तुम्हारे लगाये पोधे पर फूल खिल जाये।

सबके साथ टॉम एंड जेरी देखने में,यारो संग लम्बी लम्बी फेकने में …
बहनो संग बिना बात लड़ाई में,एग्जाम से एक दिन पहले रात की पढ़ाई में.........

क्लास में यारों संग मिली सज़ा पर,उस गली में बार बार बहाने से जाना जिसमे है उसका घर...
किसी हमदर्द क साथ युही पैदल चलने पर,खाली हो जेब और रस्ते में पैसे रूपए पड़े मिलने पर...

पहली सैलरी से पापा को टाई देने पर,उसी टाई को देख पापा का गले लगा कर रोने पर....
हिम्मत करके पूछने पर जब हाँ आये उसका जवाब,जब ड्राई डे पर मिल जाये शराब...

नहाते नहाते गाना गाने में,किसी अपने की सरप्राइज बर्थडे पार्टी सजाने में...
तत्काल में टिकट कन्फर्म पर,घरवालो के सामने एडल्ट एड् की शर्म पर....

दोस्त की १२ बजे बर्थडे की कॉल में,धोनी के विनिंग शॉट में मेस्सी के गोल में.....
सर्दी में अदरक वाली चाय की,बिना लॉक के मिले वई-फ़ाई की.....

कैंडी क्रश का लेवल जब आसानी से पार हो जाये,जब प्रेजेंटेशन पूरी ना होने पर बॉस ना आये....
ईद पर शिर के स्वाद में,नमकीन के प्लेट पर झपटा मेहमानो क जाने के बाद में.…

सबको पीछे छोड़ पतंग लाने में,माँ क पीटने पर उनसे ही लिपट जाने मे..
आपके यो यो हनी सिंह के रैप पर,जब जोक्स यारो के आये व्हाट्सप्प पर....

इंडिया के पाकिस्तान को हराने की,तेरे क्रश का तुम्हे देख कर मुस्कुराने की......
फेसबुक पर जब फोटो पर 100 लाइक आने से,जब ऑफिस से छूटी मिल जाये झुटे बहाने से…

ये सब पढ़के आपके चहरे पर जो आई है, मेने वही खुशी लिखने मे पायी है…
:-मनीष पुंडीर
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

#अधूरा
ये जो अधूरा अहसास है समझा ही नहीं पाता ख़ुद को के तू दूर है या पास है ??,
कहने को सब है यहाँ पर
औरो को क्या पता के तेरे साथ जिया करते थे अब तो जिंदा लाश है।


दिल मे एक मर्ज़ है जो लाइलाज़ है
सब कुछ नीरस है बस एक उमीद का साथ है,
वो अलविदा था बेवफाई आज भी वो अधूरी बात है।

ज्यादा कुछ नहीं मिला तुझपर जिंदगी ख़र्च करके
एक यादों की तिज़ोरी है जो संजो कर रखी है,
रोज़ तकिये पर दिल के तराज़ू में तोलता हु तो
 आज भी तेरे लिए उन यादों की कीमत दो- कौड़ी की लगती है।


आओगे कभी तो दिखयंगे के सांसे
अभी भी चल रही है बस वज़ह बदल गई है,
पहले तेरी सांसो में घुल जाती थीं आजकल तन्हा भटक रही है।
 #mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#उमीदें
ख़ुद में हो लाख दोष पर आरज़ू सब ख़ास की रखते है,
अरे जनाब फायदों को अपने लोग जी हजूरी करते कहाँ थकते है।

ग़लती पर अपनी रहम की उम्मीद रखने अक़्सर औरो को सज़ा दिया करते है,
जीवन की कड़वी सच्चाई मरना यहाँ कोई नहीं चाहता पर ईच्छा यहाँ सब स्वर्ग की रखते है।


अपने दामन में चाहे कई सुराख़ सही पर दूसरों के दाग भी सबकों बड़े लगते है,
बड़ी मौका परस्त हैं दुनीया अक़्सर लोग दोस्त बना के ठगते है।


बहुत से मिलेंगे मशवरे देने वाले बस साथ देने वालों की गिनती में गिरावट है,
 फायदे के कायदे है बचे वरना आजकल तो भावनाओँ में भी मिलावट है।
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

ये उन सभी उनके लिए जो हमारी जिंदगी में
एक माँ, बहन, दोस्त, बीवी ,बेटी और ऐसे
 कई क़िरदार बिना किसी शर्तों के निभा रही है।
#तुम
तूने जन्म से पहले ही मुझे कर्ज़दार कर दिया
पर मैंने फ़िर भी पैदा होते वक़्त तुझे बहुत दर्द दिया,
 दुनियां के लिए मैं कभी खास न था पर तूने हर बार मेरी नज़र उतारी
और सबने भले मुझे नकारा पर तूने हर वक़्त मेरा साथ दिया।


यू तो लड़ते रहे बचपन भर पर
 राखी के दिन तुझे बड़ा प्यार आता है,
बड़ा खास होता है ये रिश्ता
परवरिश में ही इज्ज़त करना सिखाता है।


फिर आती है वो दोस्त बनकर और
तमीज़ सिखाती है जँगली से तुम्हें इंसान बनाती है,
तेरी बेज़्ज़ती भी करती है पर
 कोई तुझे कुछ कहे तो उसे भी लड़ती है।


अपना सब छोड़ के सिर्फ तेरे लिए वो आती है
तुझपर भरोसा रख जिंदगी भर साथ निभाती है,
 सबका पंसद न पंसद का ख़्याल रखती है
बस अपने ख़्याल की इसे सुध नहीं रहती है।

जब जन्म लेती है घर मे ये तो
घर को पवित्र कर देती है,
लौट आता है बचपन संग इसके
बड़े नसीब वाले होते है जिनको बेटी है।
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#क़दर
कोई अगर करे कोशिश तेरे होंटो की हँसी को तो संभाल कर रखना,
हर किसी को नसीब नहीं होता उसका मुक्कमल सपना।


ऐसा नहीं है के हमें पाने की आरज़ू और नहीं रखते ,
वो और बात है के हम ऐसे ख़्याल को ही ख़्याल में नहीं रखते।


कहने भर से वादे पूरे नहीं होते कोशिशों को मनाना पड़ता है ,
प्यार एहसास है बताने से बात नही बनती जताना भी पड़ता है।


चीज़े अगर आसानी से मिल जाये तो उनकी एहमियत का पता नहीं चलता,
रोटियां भी तभी पकती है जब तक हाथ नहीं जलता ।


फ़र्क इतना ही है कुछ रुकमणि होती है तो कुछ सिर्फ मीरा रह जाती है ,
क़दर करलो मौका है बाद में सिर्फ मायूसी रह जाती है।
#mani
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#अहसास
इतने सालों में जो फासले हुवे बहुत अरसा लगा मुझे सम्भलने में,
कोशिश भी की और बहस भी खुद से वक़्त लग गया अधूरे को पूरा करने में।


ख़त्म हो चला है वो अहसास जो बरसों से बचाए रखा था,
हिम्मत और उमीद के साथ भेज दिया उसे भी जो ख़्वाब दिल में सजाये रखा था।


न आँसू निकले न दर्द हुवा बेजान हो चला जो रिश्ता बस अब बहुत हुवा,
मज़बूरियों की जीत हुई चलो बहुत हुवा तमाशा आखिरकार ख़त्म हुवा।


न खुशि बची न आँसू ......ख्वाईशो का क़त्ल भी क्या कम हुआ ?,
 दिलासे तो खूब मिले यारों पर न दुवा हुई न ही मरहम हुवा।


अब क्या रातों का हिसाब लूँ मेरी नींद भी मुझसे नाराज़ है,
कुछ नहीँ बचा मेरे पास बस यही कुछ दो कौड़ी के अल्फ़ाज़ है।


कहते है देर आये दुरुस्त आये पर देर इतनी हो चली हैं के अब दुरुस्त होने लायक कुछ बचा नहीं, सोचता हूँ मैं तो सच्चा भी था और सिद्दत भी पूरी फिर भी शायद उस "अहसास" को मैं जच्चा नहीँ।
#mani
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#ख्यालों_में
बचपन से अब तक बहुत से ख़्याल आये,
 कुछ ऐसे सवाल भी थे जो कभी न सुलझा पाए।

बचपन से अभी तक जिंदगी आधी गुज़री सुकून की आस में
बाकी आधी कुछ बेहतर के प्रयास में।

यहाँ सब डूबे हैं एक ही ख़्याल में ,
आजकल खुश कौन है अपने हाल में ???

किसी को पैसे का नशा तो कोई नशे में गुम है,
सबको यहीँ लगता है सबसे बदनसीब हम है।

होता एक आईना जो सचाई दिखाता,
 सब दूसरों को भेजते सामने उसके कोई न जाता ।।

सच बोलने से लोग नाराज़ हो जाया करते है,
अपनी चिंता छोड़ लोग दूसरों की फिक्र में वक़्त जाया करते है।

कड़वी दवाई सी सचाई है दुनीया की मतलब के ही रिश्ते होते,
तभी तो एक ज़मीन के चार हिस्से होते है।
#mani
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#बारिश
      ये जो बरसात है सब कुछ है बस तेरा नहीं साथ है,कुछ पल भीग जाऊ में भी हाथ लिए तेरे हाथ को....


न रहे कोई दूरी हम ऐसे साथ हो.. प्यार की बरसात हो तू मुझमे खोया रहे और मुझे भी बस तू ही याद हो।


अब कुछ ऐसे बरस के तर हो जाये ये मन की धरती न तुझमे कुछ बाकी रहे न मेरी बचे कोई ख़्वाईसे अधूरी, हो खुले अस्मा के नीचे और तारे साथी हो कुछ साँसों में बातें कुछ खामोशियाँ हो ज़रूरी....


वक़्त भी थम जाए तब तू मेरे क़रीब आये न दूरी हो न मजबुरी हो बस तू मेरे लिए मैं तेरे लिए ज़रूरी हो.......😊
#mani

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#सब
सब बिकता है यहाँ मिट्टी तवा बनकर,
फ़ितरत बदलते देखा है मैंने दारू को दवा बनकर।

आसमा को भी देखा रंग बदलते मौसम के साथ में,
लोगों को देखा मैंने एक दूसरे को आंकते औकात में।


मैंने वक़्त बेचते देखा है मरते किसी को देख लोगों को आँखे सेकते देखा है,
 काम से है नौकरी-यारी-रिश्तेदारी है वरना मतलब के बाद मैंने लोगों से लोगों को अलग होते देखा है।

 
झूठ बिकता अख़बार में...यहाँ सच भी बिकाऊ हैं...दाम तो लगाओ यहाँ सब कीमत के वफ़ादार है, हारने के ज्यादा पैसे है जीत की अब अहमियत कहाँ... कर्म कोई करना नहीं चाहता पर फल के सब यहाँ हकदार है।
#mani
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#रास्तें
बचपन किस रास्ते जवानी को चला गया पता ही न पड़ा,
मैं था हाथ मे कुछ फाइले ऑफिस की लिए यहाँ मेरे जैसा ही कोई था दूसरी तरफ़ बेट लिए खड़ा।


बारिश का होना अब कीचड़ से ज़्यादा कहा रास आता है वो वक़्त और थे जब कश्तियां हमारी भी तेरा करती थी,
आज नौकरी के चक्कर में वक़्त का पता नहीं चलता वरना भाग जाते थे हम जब स्कूल खत्म होने की घंटी बजती थी।


बड़े इत्मिनान से खाते थे वो अचार पराठा जो माँ टिफ़िन में दिया करती थी,
कुछ तो बात थी बचपन में जो तब ज़ुबान झूठी कसमें खाने से भी डरती थी।


क्या वक़्त आ गया है अब छुट्टी मांगने के लिए किसी को भी बीमार बता देते है,
लोगों से एक कहो वो आगे चार लगा देते है।


अब वो बचपन के मासूमियत के रास्ते पर प्लोट काट के स्टेटस के दिखावे का मकान खड़ा हो गया ,
हम भी मुँहफट से डिप्लोमेटिक और हमारा भी बचपन बड़ा हो गया।
#mani
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#यूँही
आज चाँद भी कुछ कम रोशन है बादलों की बाहों में, धरती भी बेसुध है कुछ बूंद प्यार से....

ये जो घमस है दोनों के मिलन पर ये अरसे भर तड़प की निशानी है, वो राधा में डूबे रहे और मीरा आज भी दीवानी है।

हवाओं में जो ये किसी के आंसुओं की नमी है, कौन है यहाँ जिसको सब मिला सब मे कुछ न कुछ कमी है।

सपनों की दुनियां में जी कर सब खुश है बस सच्चाई से ही कोई मिलना नहीं चाहता,दिल को तसली देने को बहानों को नौकरी पर रखा है बस इंतेज़ार का ईलाज नहीं होता।

वक़्त की नौकरी करो यादों की जायदात बनाओ बुढ़ापे में ख़र्च करो और शमशान में सो जाओ।

#mani
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#दोस्ती
      वो और मैं उन लोगों के लिए एक अच्छा उदाहरण थे जो कहते थे एक लड़का एक लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते.... स्कूल का वो दिन जब मेरे कुछ दोस्तों ने मेरे जेहन में ये बात डाली के वो सिर्फ मेरी अच्छी दोस्त नहीं उसे ज्यादा है । मन बच्चा था वो अहसास ही नया था न पच रहा था न दिमाग़ में कुछ आ रहा था फिर क्या मैं भी पूरा ढीट था कहाँ माने वालों में से था एक दिन क्लास के बाहर पकड़ लिया और न नुकुर करते करते बोल ही दिया के पसंद करता हूं, वो भी सकपका सी गयी ये क्या बोल दिया जितना समय हम दोनों को वो बात करने का मिला सिर्फ इतना याद है के उसने कहा मुझे समय चाइये।
तो मेरी कौनसा ट्रैन छूट रही थू कह दिया लो पूरा समय लो उसमे एक महीने का समय मांगा इसी बीच पड़ गया 5 sep यानी टीचर्स डे वैसे तो हर साल आता है पर इस साल कुछ खास था क्योंकि उस दिन होंना था डांस कॉम्पिटिशन और वो खास था क्योंकि जब कॉम्पटीशन के लिए नाम लिखवा रहे थे तो उसका हाथ ऊपर था और अब उसका हाथ ऊपर था तो ये बेचारा हाथ क्या करता ये भी साथ मे ऊपर हो गया।
दोनों एक गई ग्रुप में थे 5sep जैसे जैसे नज़दीक आता रहा वो परेशान रहने लगी 4 sep दोपहर का टाइम था वो आयी और परेशान होकर कहने लगी हम हार जयंगे सबकी तयारी हमसे बहुत अच्छी है, मैं उस ग्रुप में 14 कन्याओं के साथ अकेला था फिर की मैंने उसे हिम्मत दी और एक कोने में ले जाकर कहा जीत हमारी ही होगी पर वो जो एक महीने का टाइम खत्म करके उसी दिन जवाब देना होगा वो मान गयी जैसे उसे पता हो हम नहीं जितंगे।
     वो दिन भी आया हम क्या नाचे बसन्ती भी क्या नाची होगी गब्बर के सामने सब खड़े होकर once more... once more कर रहे थे हमारे जितने की मोहर तो लग गयी थी बाकी 13 लड़कियों को कैंटीन से बर्गर खिलाया सब खुश थे हम जीत चुके थे,पुरुस्कार में oxford की dictionary  मिली थी पर उसकी चिंता किसे थी।
       फिर उसे मिला जवाब मांगा वहाँ से हाँ आया उस दिन वो 13 बर्गर के पैसे उसूल हो गए फिर क्या उस दिन तो अरोरा सर् की डांट भी अच्छी लग रही थी , पर उस हाँ के 17 दिन तक मोहतरमा ने बात तक नही की मैं भी कुछ नहीं बोला 17वे दिन मैंने उसका रास्ता रोका ओर पूछा क्या हुवा उसने बस इतना कहा हम दोस्त ही अच्छे है......... वो दिन और आज का दिन है हम आज भी सबसे अच्छे दोस्त है।
कुछ रिश्ते हमेशा के लिए होते है जैसे
#दोस्ती
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

#हम_न_होंगे_तुम_न_होंगे_गीत_ही_रह_जाना_है.
              क्या ख़ूब होता है संगीत भी हर वर्ग उम्र का अपना एक स्वाद है गानों का, माँ की लोरी हो या बाथरूम में नहाते वक्त की मस्करी दिल के किसी कोने में हर असहास के लिए एक तराना होता ही है।कभी नौकरी की जी हजूरी से थकावट महसूस हो तो "सारी उम्र हम मर मर के जी लिए" सुनो उसे आपके ऑफसी की डेडलाइन या टारगेट पर तो फर्क नहीँ पड़ेगा पर वो सुस्त उदास चेहरा अब आपके होटो के साथ थोड़ी देर के लिए मसगुल हो जयेगा।
                 हज़ारों ही गाने संजो लो अपने प्लेलिस्ट में पर कभी यूँही कभी ऑटो में बैठे "पुकारता चला हु मैं घड़ी घड़ी.... सुन लोगे तो वहीं इंडियन आइडल का ऑडिशन देने लगोगे।मानों न मानों आज भी रहमान का "वंदे-मातरम" रोंगटे खड़े कर देता है, आज भी गोविन्दा का "हीरो जैसे नाच के दिखाऊ पर नाचने का मन करता है, और कभी सफर करते करते हल्की बारिश में एक ठंडा हवा का झोका आपको खिड़की से धपा करता है तो वही ढिंचक फीलिंग आती है "आज मैं ऊपर अस्मा नीचे....आज में आगे जमाना है पीछे।
                 कभी कभी एक गाने के कुछ बोल ही इतना असर कर जाते है जो दवा भी नहीं करती, वो पहला साइकिल के जमाने वाला प्यार जो मासूम होता है तब हर रोमेंटिक गाने में बस उन्ही का चेहरा दीखता है, बचपन में "जंगल जंगल बात चली है पता चला...... " गाते गाते संडे को मोगली देखना। कभी दोस्तों के संग घूमने चले जाओ तो " दिल चाहता है हम न रहे कभी यारो के बिन...... उस सफर को और भी यादगार बना देता है. इतने जमाने आये कितने  कितने गए पर आज भी हर किसी के फ़ोन में किशोर डा .. बरमन सहाब और लता जी की एक ख़ास जगह है। 
बाकि 
ये मेरा व्यक्तिगत है अगर अगर आपके साथ ऐसा नहीं है तो भाई सो जाओ
शुभ रात्रि 😉
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#ख्याल
क्या अहसास है ये भी बस सोच सोच मोक्ष के द्वार तक हो आता है,
किसी से कोई उम्मीद भी नहीं रखनी पड़ती और पल भल के लिए सही मन तृप्त हो जाता है।



सच्चा साथी यहीं है अकेला देखते ही आपको तुरंत आ जाता है,
 कभी किसी पुरानी यादों को ताज़ा कर देता है तो कभी किसी अधूरी ख्वाईश का रोना रो जाता है।



रातों को नींद न आये तो भी ये ख़ूब साथ निभाता है,जिनका वास्तविक्ता का कोई लेना-देना नहीं ज़नाब ऐसे ऐसे दृश्य दिखाता है।



कभी तो ये हमें बैठे-बिठाये मीलों का सफऱ तय करवा जाता है,
 जिन हसरतों को हम पूरा नहीं कर सकते ये खुद-ब-खुद में पूरा कर आता है।



बड़ा मनमौजी है ये इसपर क़ोई जोर नहीं चलता, ख़्याल है ये शाहब दिमाग़ से खूब बतियाता है पर शोर नहीं करता।

#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है...

#समझ
मैं पसंद तो सबकी हूँ पर मौका पड़ने पर, 
क़ाबिल भी समझा जाता हूँ कभी कभी दूसरों का काम करने पर।

अपने मतलब के हिसाब से मुझे पहचानते चले गए,
कुछ कामयाब निकले कुछ मुझे हारते चले गए।

बड़ी शिद्दत से निभाया मैंने हर किरदार जिसने मुझे जो दिया,
पर आखिर में वो आगे बढ़ गए मुझे मेरी कामिया गिना कर।

अजीब दौड़ है औकात को हैसीयत में बदलने की,
तर्रकी के लिये कुछ भी कर गुज़रने की।

अब कहा कोई गर्मियों की छुट्टियों में गांव जाते है,
जिस दिन जयदा गर्मी लगी जनाब उस दिन स्वीमिंग पुल हो आते है।

दो वक़्त की रोटी के चक्कर में इतनी मसगुल हो गयी ज़िंदगी,
के याद नहीं के आख़री बार फ़ुरसत से खुद से रु-ब-रु कब हुवे थे।

वज़ूद कुछ ऐसा हो गया है के अपने शिकायत रखते है और पराये जलन करते है,
हम अभी भी नादान है पता नहीं लोग कैसे अच्छे- बुरे की समझ रखते है।

:-मनीष पुंडीर 
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... .

 #उम्र
 अब उम्र हो चली है उस उम्र की
जब हम बेफिक्र थे,अब तो बस जिंदगी को
 क़ाबिल बनाने में लग है ख्वाईशो
 को हासिल कराने में लगे है....


आदत हो गयी आदत बदलने की माहौल देख के माहौल में ढलने की,
ये दुनियां बड़ी फ़नकार है हुनरमंद को ही पूछती है ग़लती करने वालों को नहीं मिलती मोहलत दुबारा सम्भलने की.....


उम्र लग गयी लोरी से नौकरी पर आने में बहुत कुछ बदला है वहाँ से यहाँ आने में,
हम तो खुश थे अपनी मासूमियत के साथ पर क्या करे क़दर ही यहाँ चालाकी की है जमाने में...
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है...

#हसरते
लाखों हसरते है ऐसी के न बताई जाये न दबाई जाये,
दुनियां बड़ी चंट न समझ आये और न अपनी किसी को समझाई जाये.....

परिंदा बन उड़ने को मन खूब ज़िद तो करता है,
पर मज़बूरी शिकार खूब जानती है ये बात इसे कैसे समझाई जाये ??

नदी किनारें सभी अहसासों का एक दिन में हिसाब करूँगा,
लहरें पैरों को छूकर फिर लौट जायेगी पर मैं नही माफ़ करूँगा।।

आईने में देख खुद को आँखों में बचपन टटोलता हूँ,
अक़्सर अधुरी ख्वाइशों का बोझ लेकर तकिए पर सोता हूं।।

इस शहर के शोर से दूर कही दूर बस जाऊ जहाँ दिए के उजाले में आज भी दादी-नानी सर सहलाये,
बारिश के पानी में कस्ती अपनी बढ़ाये आज फिर किसी बगीचे से आम तोड़ के खाये।।

कुछ है मेरी हसरतें जो पैसे से कीमती है बेचूँगा किसी दिन इन्हें कोई ख़रीदार मिला तो,
पर फिर मन ये पूछे मुझसे इन दो कौड़ी के जज़्बातों की क्या कीमत लगाई जाए ??

वैसे मेरे अपने कहते है हँसना भूल गया हूं मैं अब उन्हें क्या वजह बताई जाये,
मेरे यारों खुश हूँ तुम हो बस ख़ुद से खफ़ा हूं अब छोड़ो यार क्या नाराजगी जताई जाये।।
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढ़ावा देने का ये प्रयास है.


#काश
वो पल बड़ा याद आता है जब वो बीत जाता है,
जानते सब पर समझते नहीं है के बिता वक़्त लौट के कहाँ आता है।

काश वो वक़्त भी आये जब सच्ची खुशि का मतलब समझ जाए, 
कभी पापा संग एक chess का गेम हो जाये और बहुत दिन हुवे माँ के पाँव दबाये।

कल जब कोई दूर चला जयेगा जो लौटेगा तो नहीं पर याद रोज़ आएगा, 
खुद ही बनानी पड़ती ही यादे जनाब वरना सही वक्त के इंतेज़ार में अक़्सर मायूसी रह जयेगी।

जिदगी खर्च हो गई आधी क़ाबिल बनने में आधी कमाई करने में, 
कइयों को देखा है मैंने मलाल करते पहले अनदेखा करते हुवे बाद में हाथ मलते हुवे।


अपनों के साथ वक़्त बिताओ खुशि बांटो हँसी बाटो, क्या पता कल आप हो वो हो न हो......
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है...




कैसे आधे मन से तुझे जीलूँ जब आजतक आधा-अधूरा कुछ किया नहीं, 
सब तो पता है तुझे क्यों चुकाऊँ कोई भी बोझ जब मैंने तुझसे उधार कुछ लिया नहीँ।

बहुत लंबी list है तुझसे हिसाब बाद का रहा अभी वो बेफिक्री वाली हँसी ढूंढना बाकि है,
दो पल ख़र्च करलू ख्वाइशों पर ये तमीज़-तहज़ीब दिखाने को अभी उम्र बाकि हैं।

कुछ यादों से धूल हटानी बाकि है तो कुछ मन के संदूकों में आग लगानी बाकि है,
वो कागज़ की कश्ती,वो बर्फ की चुस्की इस तन्खा परसत शरीर को अभी बचपन याद दिलाना बाकि है।

कुछ पास है उन्हें ख़ास बनाना बाकि है कुछ तमन्नाएं बाग़ी उन्हें अयना दिखाना बाकि है,
रोज़ कब्बडी खेलते है दिल और दिमाग सही-गलत के अखाड़े में अभी किसी एक को चित कराना बाकी है।

#Mani

dancing doggi

प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढ़वा देने का ये प्रयास है.

#क्यों ???
क्यों है इतनी नफ़रत दिमाग़ में जब दिल ही काफ़ी है प्यार जताने को ??, 
क़भी यूँही मुस्कुरा भी दीजिये क्यों परेशा करे किसी बहाने को ??


चार सांसो की डोर है जिंदगी टूटने से पहले उड़ान तो भरे आसमान की,
ख़ुद से कभी ख़ुद का हाल पूछे ?? करते रहे फिक्र जमाने की....


इतनी भी क्या बेरूखी ख़ुद से के कभी फुरसत को भी फुरसत न हुई हमारे पास आने की ??,
 अजी पहले ख़ुद को चाहों फिर ज़हमत करना किसी और को चाहने की....


क्यों लिए फिरते हो दूसरों की सोच का बोझ बहुत सी यादें बची है बनाने की,
कभी खेल का मज़ा भी क्यों हर वक़्त सोचना दूसरों को हराने की ???
#mani

प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढ़वा देने का ये प्रयास है.


#इतनी_सी_जिंदगीकाश कभी इतनी सी जिंदगी दे, मेरे अपनों के चहरे पर मेरी वजह से हँसी दे।

थोड़ा वक़्त मिले फिर से बच्चा बन जाने को,एक बार फिर पेड़ से आम तोड़ के खाने को...

एक बार फिर जी जाऊ वो स्कूल न जानें के बहाने को,फिर पापा की साईकल पर जाऊ मैं हर श्याम आइसक्रीम खाने को...

वो रूठे यार मनाने बाक़ी है जिनके होने से ही जिंदगी काफ़ी है, कुछ ख्वाइशें पूरी पर कुछ ख़्याल अभी भी बाक़ी है...

थोड़ी सी और जिंदगी मिले ख़ुद को क़ाबिल करने को,कुछ यादें और मिले खुशियां पुरी करने को..

कुछ वज़ह और दे दिल और दिमाग़ को लड़ने को,अभी तो अकेले चलना सीखा हूँ जिंदगी पड़ी है संभलने को..... #mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढ़वा देने का ये प्रयास है.


#कब_तक
ख़ुद को दूसरों की आंखों से कबतक मोलते रहोगे,
कब तक यूँही ख़ुद पर बाकियों की सोच को ढोते रहोगे।

हर रात ख़ुद से ख्यालों की खुद्खुशी का हिसाब करता हूँ,
 बड़ी अजीब हो चली है जिंदगी हर दिन जीने के लिए थोड़ा थोड़ा मरता हूँ।

उस मुक़ाम तक आ चुका है सब्र मेरा के अब आँसू-हँसी का हिसाब नहीं होता,
अब भुला दिए सारे वो सवालात जिनका जवाब नहीं होता।

पर बात वही रह गयी जहाँ से सुरू की थी आख़िर कब तक......... ???????
#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढ़वा देने का ये प्रयास है.
एक बड़े अंतराल के बाद मैं लौट आया वो क्या कहते है अंग्रेजी में "i m back". अब आ ही गया हूँ तो चलो कुछ बातें करते है.
           #मायाजाल ...... 
   ये लेख सिर्फ एक सोच पर आधारित है किसी व्यक्ति विशेष से इसका कोई मेल नहीं है और अगर आप इसमें खुद को जुड़ा महसूस करते है तो मुबारक हो आप भी मायाजाल के अंदर है.
आजकल " रोटी-कपड़ा और मकान" ये पुराना हो चला है अब नया चला है "वाई-फाई-चार्जर और आराम"  
कहने में कितना अच्छा लगता है न... जियो जी भर के पर वाकई इस बात पर अमल होता है, हम हर वक़्त सोच से घिरे होते है।जैसे जैसे इंसान बड़ा होता जाता है चीज़े भी बड़ा आकार ले लेती है पता ही नहीं चलता स्कूल का सलेबस कब कंपनी के प्रोजेक्ट में बदल जाता है,कब जिदगी नार्मल से फॉर्मल हो जाती है। 
               अगर कुछ देर हम ये "समझदारी" के ढोंग को छोड़ दे तो हम सबको पता होता है के परेशानी क्या है और उसका उपाय भी, पर कौन उतना ध्यान दे अभी तो फिलहाल ध्यान तो इस बात पर है के फसेबूक पर मेरी फोटो पर कम लाइक पर उसकी में ज्यादा कैसे ???  यकीं माने हर दिन नया स्टैटस व्हाटसअप ले लिए दिमाग की नसे फुला देता है। 
       
 इंटरनेट के मायाजाल का ये आलम है के आजकल सबको ये तो पता के ट्विटर पर क्या ट्रेंड कर  रहा है पर ये नहीं पता के घर में क्या चल रहा हैं, एक जमाना था जन 4 दोस्त मिलते थे तो ढेर साडी बातें होती थी अब जहाँ 4 दोस्त मिलते है गर्दन निचे और फोन हाथ में अब दोस्त व्हाट्सएप ग्रुप्स पर मिला करते है। 

        हमारा भी जमाना था जब अच्छे मार्क्स आने
          पर साइकिल का लालच दिया जाता था 
          और वो भी हमे खूब भाता था, 
अब तो iPhone  से निचे बात कहा बनती है 
घर पर भले ही बनियान में हों 
पर DP पर ब्रेंडिंड कपड़ो के साथ ही फोटो लगनी है ।


इस कदर खोये है इस मायाजाल में 
न खाने का होश बचा न नींद की चिंता 
इन्टरनेट पैक कब खत्म है ये कोई भूलता नहीं  
सब गर्दन झुका कर चलते है आजकल हालचाल कोई पूछता नही । 

धन्यवाद 
#Mani 
              

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प्रयास कुछ बेहतर के लिए.....सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढ़वा देने का ये प्रयास है.

Mushayera || funny_shyari || Manish Pundir

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