Saturday, 11 October 2014

अन्धविश्वास

वहम की कोई दवा नहीं होती।

                     न्धविश्वास ये शब्द आपके लिए नया नहीं है,क्युकी भारत में ये उतना ही जाना और माना जाता है जैसे के भगवान को लोग पूजते है।कहने को हम चाँद पर पहुँच  गए और तो और अब तो मंगल पर भी हम ही सबसे पहले जा घुसे पर ज़रा एक काली बिल्ली सामने से निकल जाये मजाल जो कदम भी आगे बढ़ जाये, मन दुखता है जब सुनता हुँ के इस अन्धविश्वास के अँधेरे के तले कितने पाखंडी अपना धंधा चला रहे है।ये हमारे यहाँ सब चीज़ में जुड़ा है नाख़ून काटने से लेकर कौवे के काव काव करने तक,कही न कही पढ़ लिख कर सिर्फ डिग्री हासिल करना ही सब कुछ नहीं होता आपको अपने आसपास फैली निरक्षरता को दूर करने की कोशिश भी करनी चाइये।
                                     बचपन से ही सिखाया जाता है गुरुवार को बाल नहीं कटाना शनिवार को तेल दान नहीं करना मंगल के दिन अंडा-मांस नहीं खाना अगर धर्म की बात की जाये तो हर दिन हर वार किसी न किसी भगवान को समर्पित है तो इसका मतलब निकाल तो आप एक देव को दूसरे देवों की तुलना मेँ जयादा अहमियत दे रहे है फिर तो????? आगे अन्धविश्वास के हिसाब से चलो तो आपके नाख़ून रात के समय काटने से दुर्भाग्य आता है,अगर आपके घर के बाहर कोई कौवाँ आवाज़ कर रहा है तो आपके घर में कोई मेहमान आने वाला है।बिल्ली का रोना ग़लत माना जाता है अरे जनाब आप इंसान हो तो क्या रोने का परमिट सिर्फ आपके पास है??? कोई मुझे ये बात भी जोड़ के बता दे के कड़ाई में खाने से आपकी बारात के दिन बारिश कैसे आ सकती है???? किसी के छींकने से  किसी का काम कैसे बन और बिगड़ सकता है ??? बहुत से सवाल है जो पहले से हम पर थोपे गए है पर इनकी सुरुवात कहाँ से हुई और कैसे ये सार्थक साबित होते है ये ज़वाब नहीं मिलता।
                                      मुझे हमारे इस अन्धविश्वास के सिद्धांत को समझने में थोड़ी दिक्कत इसलिए आती है क्युकी मैंने ये हर वर्ग हर जाती के लोगों में देखा है पर तर्क के नाम पर सब असफल नज़र आते है,आप किसी की कुंडली का दोष मिटने के लिए उसकी शादी पहले पेड़ या जानवरों से करवाते हो और अगर उसी समाज में कोई आदमी पहली अर्धांग्नी होते हुवे दूसरे विवाह को गलत मानते हो तो दोनों बातें  ही एक दूसरे के उलट नज़र आती है।टूटे शीशे में आप खुद को नहीं देख सकते अगर कोई अँधा है उसके लिए तो ये लागु ही  नहीं होता तो क्या उसके किस्मत के मायने हमसे अलग हो गए,एक तोता अगर आपका भविष्य बताने में माहिर है तो सब घर में तोते ही पाल लो।किसी की हाथों की रेखा देख अगर उसकी सफलता के बारे में बतया जा सकता है तो जिनके हाथ नहीं वो तो कभी सफल हो ही नहीं पायंगे,अगर नींबू -मिर्ची के भरोसे बुरी नज़र से बच सकते है तो सब गोदाम खोल लेते,जो अमीर है उसकी उंगलियों में हीरा-पन्ना जैसे रत्न होते है और गरीब के हाथ रोटी को तरसते है।


                              कुछ दिन पहले आये थे एक बाबा जो परेशानियाँ समोसों की चटनी और कपड़ो के रंग बदलके दूर करने का दावा  करते थे,यार इतना तो बचपन में माँ-बाप भी नहीं फुसलाते थे जितना हम अन्धविश्वास को लेकर इन जैसे बाबाओं के शिकार  होते है।मुझे कुछ बदलना या कुछ सीखना नहीं है  आप लोगो को बस एक प्रयास है इस भेड़ चाल के समाज़ को बेहतर बनाने का,और पहले वो पहले वो के चकर  में कभी भी कुछ नहीं बदला खुद से शुरू  करो और याद रखो छोटी-छोटी चीज़े मिलकर ही कुछ बड़ा कर पाओगे।बाकि जब पढ़ लो तो कॉमेंट जरूर करना वरना क्या पता कुछ अशुभ हो जाये??? ………हा हा हा हा 


:-मनीष पुंडीर 
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