Thursday, 18 September 2014

‪खामोशी‬

दिल में एक फ़ास है जो लाईलाज है.।

प्यार जिसका पहला अक्षर ही विकलांग है,क्या उम्मीद करू इसे!!!!
खुद तो लाचार है,जिसके पास होता है वो भी लाचार हो जाता है.. 

यु यूँ   गयी है हालत अब के हालातों पर भी खुद की अब हँसी  आती है.…
कल तक जो ख़ास था जीना-मरना जिसके साथ था,आज वो ही पास नहीं है.… 

शिकायतों के सिवा अब और कुछ बचा नहीं,हम प्यार को और प्यार हमे कुछ जच्चा नहीं।
लड़ने की भी उसे अब हमारी हिम्मत नहीं होती,ये खेल नहीं यहाँ  जीत किसी को नहीं होती।

अब ना कुछ खोने का डर है और ना ही किसी को पाने की चाह.… 
आँखों में है आँसू पर में रोता नहीं,वो दिख ना जाये ख्वाबो में ये सोच में सोता नहीं।

नफ़रत भी होती है उसके दूर होने के ख्याल से पर फ़िर अपने ही प्यार पर शक होता है.। 
पता उसे भी है के खबर हम उसकी आज भी रखते है,बस अब वो जताते  नहीं और हम बताते नहीं ....

अपनी बेफ़िक्री का बहाना बना हँसी खुद की उड़ा लिया करते है,अंदर आज़ भी दिल-ओ-दिमाग लड़ा करते है.. . 
यारों में बैठ कभी जिक्र जो तेरा हो जाता है,हम भी यादों के पन्नों से कुछ चुरा लिया करते है.…

मंजिल भी खो दी हमसफ़र भी नहीं रहा,नहीं होगा अब हमसे अब हमारी दुवाओं में वो असर नहीं रहा.....
प्यार इश्क़ और मोहब्बत जो खुद आधे है,बस उसी को पूरा करने में मेरी कहानी अधूरी रह गयी.……


आज मन शांत है,दिमाग किसी उधेड़बुन में लगा है.… 
यूँ तो बहुत है उलझने पर सुलजाने का मन किसका है.…
किसको दोष दू इस बात का,अब बहस करना भी हमारे बस का नहीं।

सुनकर ग़ज़लों को उनकी धुन में खुद को गुम कर रहा हुँ..... 
कोई शिकायत नहीं किसी से है बाकि एक फ़ास है जो लाईलाज है.।
काश कहने से भी अब होगा क्या?? वक़्त बदलेगा नहीं और किस्मत समझेगी नहीं।
कुछ सिख लिया है इस अकेलेपन से जैसे खुद को पा लिया हो तुझे खोते खोते....
प्यार से अपना हिसाब अभी बाकि है,बुलाओ उस यादों को जिसने हमे देखा साथ में.....
फिर बताऊंगा इस दिल को के फर्क इतना है,मुझमे और मेरे प्यार में.....
प्यार को मरना नहीं आया और उसके बगैर हमें जीना नहीं आया.........

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