प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

#तू 

क्या कहदु वो लब्ज़ नहीं जो तुझे बयां करदे,
आओ कभी मेहमाँ बन कर हमारे पास और खुद को हम पर फना  करदो |


तू हँसने का बहाना मेरा,
तू न सोचे क्या असर है मुझ पर तेरा।

तू जैसे सर्दी की धुप सा,
मेरी नज़र से तू एक बच्चा मासूस सा।


तेरे साथ लापरवाही भी सुकून देती है,
तू दूर ही सही पर तेरे लबो पर हस्सी अच्छी लगती है।


आरज़ू बहुत है पर बस कुछ पल अपने मेरे नाम करदो,
कभी मिलो फुर्सत से सुबह मिलो और साथ श्याम करदो।


मत सोच न मेरा न तेरा ये जमाना है,
एक मोका दे तू क्या है मेरे लिए ज़रा इत्मीनान से बताना है।
 
:-मनीष पुंडीर
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#बचपन _की_यादें



आज पूरी सैलरी भी वो सुकून नहीं देती,जो बचपन का वो एक रुपया देता था.....
आज ऑफिस-कम्पटीशन की ज़द्दोज़हद है वो भी क्या जमाना था जब में बेफिक्र रहता था.।

आज ऑफ्स के लिए अलार्म लगा के टाइम से उठता हुँ पर तब भी लेट हो जाता हूँ.
कभी क्रिकेट खलने के लिए 5 बजे उठ कर मै ही टीम इकठा किया करता था।

मिस करता हुँ उस ज़माने को जब हम पीछे बेंच पर बैठे किताबों में क्रिकेट खेला करते थे.…
और कॉपी के पीछे "FLAMES" उसके नाम के साथ लिख कर दिल को तस्सली दिया करते थे।

छोटी छोटी आँखों में बड़े बड़े सपने थे,जब विद्या रानी की कसम दी जाती थी.…
एग्जाम की आखरी रात की पढ़ाई और पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग के दिन सबकी शामत आती थी।

टीचरों के अलग अलग नाम रखा करते थे,गेम्स पीरियड के बाद लेट पहुँचा करते थे..
15 ऑगस्ट पर लड्डू की लाइन में दो-तीन बार लगना,मॉनिटर का ब्लैकबोर्ड पर नाम लिखने पर लड़ना।

on/off के स्विच को बीच में अटकाने की कोशिश किया करते थे,जब भीड़ में अकेले होने से डरते थे..
मेहमानों के जाते ही नमकीन के प्लेट पर झपटते थे और माँ मुझे ज़ायदा प्यार करती है इस बात पर बहनो से लड़ते थे।

खेल-खेल फोड़े मैंने बड़े कॉलोनी की खिड़कियों के कांच पर,अब कैंडी क्रश ही बचा है खेल के नाम पर आज.…
पहले दोस्त उसके पास प्यार का पैगाम ले जाता था,आज व्हट्सऐप और हाईक के स्टिकर्स में ही हो जाता है आधा रोमांस।

वो बात करते पकडे जाने पर क्लास के बाहर खड़ा रहना,वो काम पूरा ना होने पर कॉपी नहीं लाये कहना....
आज बर्गर पिज़्ज़ा भी वो मज़ा नहीं देता जो कभी लंच में साथ खाए पराठे और आचार का स्वाद आता था।

wednesday को वाइट शूज ना लाने पर प्रेयर बंक किया करते थे,जब मैग्गी और पार्ले-जी पसंद करते थे..
आज एक मैसेज पूरा पढ़ना भारी पड़ता है,तब लइब्रेरी में जाकर पढ़ी हुई "चंपक" भी अच्छी लगती थी।

दिवाली में बाथरूम में फूटा मेरा रखा पटाखा,क्लास में मस्ती करते वक़्त मेम से पड़ा चांटा....
हर शरारत पर मेरी t.c की धमकी देना,हर एग्जाम में मेरा लड़कियों से पेन लेना।


यादों की बारिश में में अपनी बचपन के पन्नों की कश्ती तैरा रहा हुँ,
तुम्हे भी शायद कुछ याद दिला रहा हुँ.

धन्यवाद
:-मनीष पुंडीर
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

सब_बिकता_है

 र चीज़ बिकती है आजकल हवा और पानी भी,
 पढ़ाई बिकती स्कूलों में और सपने बिकते मजबूरियों में।।


सब बिकता है यहाँ तरीकों से..
मैंने देखा है मिट्टी को बिकते तवा बनकर,
अब तो हवा भी बेचते लोग ग़ुब्बारे में भरकर।


जिंदा रहकर किसी ने न पूछा मरने के बाद हर एक शोक जताने आया है,
फ़ितरत बदलते देखा है मैंने जिनके लिए ज़हर थी कभी
आज उसी ने दारु को दवा बताया है।


मैंने दुनियां में शादी के नाम पर लड़का बेचते देखा है,
कामयाबी जुवे जैसी हो गई है
जीतेगा वहीँ जिसने ज्यादा पैसा फेका है।


काबलियत की कीमत कम हो चली है अब तो मार्केट में रेफरेंस चलता है,
 आग तो यूँही बदनाम है आजकल आदमी तो एक दूसरे का पैसा देख के जलता है।


अपनों की खुशियों के लिए हर कोई रोज़ ख़ुद को थोड़ा थोड़ा खर्ज़ कर रहा है,
कभी  बचपन तो कभी जवानी बेच के यूँही वक़्त गुजर रहा है।

:- मनीष पुंडीर

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प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.







सब_बिकता_है
       हर चीज़ बिकती है आजकल हवा और पानी भी, पढ़ाई बिकती स्कूलों में और सपने बिकते मजबूरियों में।।

  सब बिकता है यहाँ तरीकों से..मैंने देखा है मिट्टी को बिकते तवा बनकर, अब तो हवा भी बेचते लोग ग़ुब्बारे में भरकर।

जिंदा रहकर किसी ने न पूछा मरने के बाद हर एक शोक जताने आया है, फ़ितरत बदलते देखा है मैंने जिनके लिए ज़हर थी कभी आज उसी ने दारु को दवा बताया है।

मैंने दुनियां में शादी के नाम पर लड़का बेचते देखा है, कामयाबी जुवे जैसी हो गई है जीतेगा वहीँ जिसने ज्यादा पैसा फेका है।

काबलियत की कीमत कम हो चली है अब तो मार्केट में रेफरेंस चलता है, आग तो यूँही बदनाम है आजकल आदमी तो एक दूसरे का पैसा देख के जलता है।

अपनों की खुशियों के लिए हर कोई रोज़ ख़ुद को थोड़ा थोड़ा खर्ज़ कर रहा है, कभी  बचपन तो कभी जवानी बेच के यूँही वक़्त गुजर रहा है।

प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#हालात
कुछ यूँ है इन हालातों की कहानी,
कुछ सपने जी गया कुछ रह गए बेजुबानी।

कुछ अपनों के लिए कुछ अपने छोड़ आया,
कुछ के साथ हूँ कुछ को यादों संग लाया।

सबकी खुशि के लिए अपने हिस्से की थोड़ी कम करदी,
दूसरों को हसाने को हमने अपने आँसुओ की गिनती खत्म करदी।

चाहना और उसी चीज़ को पा जाना एक इतफ़ाक है,
जिन्दगी एक सफ़र है खुशि से जी मेरे दोस्त आखिर में होना राख है।

हर पल को जीता हूँ आगे की फ़िक्र मैं करता नहीं,
हार ज़रूर जाऊ मंजूर है पर कभी कोशिश करने से मै डरता नहीं |

कुछ लोग मूडी कहते कुछ कहते नासमझ तो कुछ ने बेअक्ल के तमगे से नवाज़ा है,
अब कौन सुने सबकी कल खुद पर आएगी तो जानेंगे ये सब वक़्त का तकाज़ा है।

एक दिन यूँही हालातों से पूछ बैठा कभी कभी हँसा दिया कभी फसा दिया तेरे ये क्या किस्से है ??..
 बड़े प्यार से बोला वो तू अकेला नहीं है सभी को जितनी हस्सी मिली उतने ही आँसू उसके हिस्से है।

#mani
प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


उनके लिए
जो काम के लिए #माँ
से दूर है

खुद में रखा मुझको इस दुनियां में लाने को,
तेरे लिए लाखों में एक हु चाहे लाख बुरा मै जमाने को।

तू न होता तो मेरी परवाह करता कौन ??,
मेरी शरारतों और मेरी ज़िद के लिए पापा से लड़ता कौन ??

माँ वक़्त तुझे मै दे पाता नहीं,
प्यार तो बहुत है पर मेको जताना आता नहीं।

बचपन में चोट मुझे जो यूंही लग जाती थी,
मै तेरी गोद में सो जाता था पर सारी रात तू जागती थी।

मेरी पसन्द का मुझसे ज़्यादा तुम्हें ख्याल था,
अब दूर हूँ पर परवाह आज भी है जब भी फ़ोन आया
"खाना खाया" ?? हर बार यही सवाल था।

आपने मुझे चलना सिखाया खुद की ख्वाइशों से
पहले मेरी चाहतों का आपको ख्याल आया,
मै नादान अभी तक समझ न पाया प्यार तो बहुत है
 आपसे न जताना आया न बताना आया।

होंगे किसी के राम किसी का अल्लहा मालिक,
मेरे लिए तू मेरी आँखों के सामने तू ही मेरा भगवान।

याद आता है जब खाना मेरी पसन्द का न हो तो मै खाता नहीं था,
आज अपने हाथो की खिचड़ी से भी रात गुज़र जाती है
तब माँ सच में तेरी याद बहुत आती है।

आता हूँ जब छुटियों में घर तो मेरी पसन्द का सब आप बनाते हो,
बड़ा सुकून मिलता है जब वापस लौटते वक़्त मुझे गले से लगाते हो।

 
#mani

Bakchod dost | every gang has a irritating friend | IPS ki tyari | Manis...



प्रयास कुछ बेहतर के लिए.....सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.

प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है. #तू  क्या क...